मुहतरम सय्यद ज़हीरोद्दीन नाज़ीमोद्दीन साहब, जिन्हें सुखनवरों की दुनिया में “साजिद” नाम से जाना जाता है, जो स्कूल के ज़माने से ही शायरी का शौक़ रखते हैं। जहाँ इन्होंने उर्दू अदब की अज़ीम हस्तियों को पढ़ा और समझा। बीस साल की उम्र से ही इन्होंने शेर ओ ग़ज़ल कहने का सफ़र शुरू किया और इस सफ़र में इन्हें मुहतरम आबिदीन साहब, मुहतरम कमाल साहब, मुहतरम जोश साहब और मुहतरम रहबर साहब जैसे उस्ताद शायरों की भरपूर रहनुमाई और रहबरी मिली।
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